भारत सरकार देश की ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने और प्रदूषण को कम करने के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव की ओर अग्रसर है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 27 अप्रैल 2026 को मोटर वाहन अधिनियम के तहत एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। इस प्रस्ताव के अनुसार, अब देश में केवल पेट्रोल ही नहीं, बल्कि इथेनॉल और बायोडीजल के उच्च मिश्रण वाले ईंधनों के लिए भी नए मानक निर्धारित किए जाएंगे।

सरकार का नया प्रस्ताव क्या है?

सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम-1989 में संशोधन करने की तैयारी कर ली है। इस मसौदा अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य ईंधन के वर्गीकरण में परिवर्तन करना है।

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पेट्रोल का नया नाम: अब तक पेट्रोल को E10/E के नाम से जाना जाता था, जिसे अब बदलकर E10/E20 कर दिया जाएगा।

उच्च इथेनॉल मिश्रण: इस प्रस्ताव में E85 और E100 जैसे ईंधन शामिल हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में वाहन 100% इथेनॉल पर चल सकेंगे।

बायोडीजल अपडेट: डीजल वाहनों के लिए बायोडीजल मिश्रण की सीमा को B10 से बढ़ाकर B100 करने का प्रस्ताव है।

पिछले वर्ष का 20 यूरो का लक्ष्य पूरा हो गया था।

भारत ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का अपना पूर्व लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। अब सरकार E25, E27 और E100 तक पहुंचना चाहती है। इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाले अरबों रुपये की बचत होगी और इथेनॉल उत्पादन के माध्यम से किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

सकल वाहन भार (GVW) में परिवर्तन

सरकार ने वाणिज्यिक वाहनों के लिए भी एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। वाहनों का कुल भार 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम किया जाएगा। इस बदलाव से छोटे ट्रकों और लोडिंग टेम्पो के लिए नए उत्सर्जन मानक लागू होंगे। इसके अलावा, एचसीएनजी (हाइड्रोजन मिश्रित सीएनजी) से संबंधित तकनीकी शब्दों में भी संशोधन किया गया है।

इसका कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से होगा।

ये बदलाव एक साथ लागू नहीं किए जाएंगे, बल्कि चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। E20 ईंधन पूरे देश में आम तौर पर उपलब्ध होगा, जबकि E85 और E100 जैसे विकल्प विशेष रूप से 'फ्लेक्स-फ्यूल इंजन' तकनीक से लैस वाहनों के लिए पेश किए जाएंगे। मसौदा फिलहाल जनता की राय के लिए खुला है, जिसके आधार पर सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करेगी।