क्या गुजरात में बिजली आपूर्ति खतरे में है? राज्य में रिकॉर्ड तोड़ बिजली खपत को देखते हुए, आगे की योजना बनाना जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री हृषिकेश पटेल और शीर्ष सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है ताकि बढ़ती बिजली मांग के बीच राज्य में बिजली कटौती या बिजली संकट न हो।

यह ध्यान देने योग्य है कि कमजोर मानसून, लगातार बढ़ती गर्मी और त्योहारों से पहले उद्योगों की चहल-पहल के कारण गुजरात में बिजली की मांग सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। राज्य में 16.10.2026 को बिजली की मांग अब तक की सबसे अधिक 29,822 मेगावाट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष अक्टूबर के इसी महीने की तुलना में 36.6% अधिक है। इसके साथ ही, दैनिक बिजली की खपत में भी 27% की वृद्धि हुई है और यह 574 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है।

गुजरात में प्रतिदिन लगभग 12,000 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होता है, लेकिन शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच सूर्यास्त के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन शून्य हो जाता है। साथ ही, कम हवा की गति के कारण पवन ऊर्जा उत्पादन में भी कमी आई है। शाम के समय शीतलन और कृषि कार्यों में एक साथ वृद्धि होने के कारण, निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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इस वर्ष, अल नीनो के प्रभाव और कम मानसून के कारण, किसानों की खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई हेतु बिजली की मांग में भारी वृद्धि हुई है। कृषि क्षेत्र का बिजली भार बढ़कर 12,000 मेगावाट प्रतिदिन हो गया है। वहीं दूसरी ओर, गुजरात और पड़ोसी राज्यों में कम वर्षा के कारण जलविद्युत उत्पादन जैसी पनबिजली परियोजनाओं में भी बाधा उत्पन्न हुई है।

इससे पहले, राज्य के ताप विद्युत संयंत्रों को चालू रखने के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने हेतु दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने नवंबर से प्रतिदिन 13 से 14 रेलगाड़ियों कोयले की आपूर्ति का आश्वासन भी दिया है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने एनटीपीसी और असम विद्युत उत्पादन से गुजरात को कुल 880 मेगावाट से अधिक अतिरिक्त बिजली आवंटित की है।

यह उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने दावा किया है कि शाम की मांग को पूरा करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) पर काम चल रहा है। 500 मेगावाट/1,000 मेगावाट-घंटे की क्षमता वाली यह प्रणाली मार्च 2027 तक चालू हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, NPCIL के साथ मिलकर 4,200 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना और उकाई में एक नए 800 मेगावाट के तापीय संयंत्र पर भी काम जारी है।

वर्तमान में, मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक उपाय और दीर्घकालिक योजना बनाई जा रही है। इस समीक्षा बैठक में कृषि कार्यों का भार दिन के उजाले के समय में स्थानांतरित करने और सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने की भी योजना बनाई गई है।

राज्य लोड डिस्पैच सेंटर और बिजली वितरण कंपनियां ग्रिड संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बिजली की मांग और आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की है और बिजली विभाग को भविष्य की योजना बनाने और बिजली उत्पादन बढ़ाने के कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है।