मध्य पूर्व इस समय एक भयानक युद्ध की आग में जल रहा है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद ईरान अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। ईरान जिस तरह से इज़राइल और अमेरिका के आधुनिक हथियारों का सामना कर रहा है, उसका असली रहस्य ज़मीन के ऊपर नहीं, बल्कि सैकड़ों फीट नीचे छिपा है। ज़मीन से 1600 फीट नीचे स्थित 'मिसाइल सिटी' में ईरान के पास मिसाइलों का ऐसा भंडार है जो उसकी नियमित सेना से भी कहीं अधिक घातक है।

फरवरी 2025 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पहाड़ों के नीचे और रेगिस्तान की रेत में 1600 फीट की गहराई में एक पूरा 'मिसाइल शहर' बना लिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास तेहरान, रमनशाह और सेमनान जैसे शहरों के नीचे ऐसे 5 गुप्त मिसाइल स्टेशन हैं। ये सुरंगें इतनी मजबूत और गहरी हैं कि अमेरिका के सबसे शक्तिशाली 'बंकर बस्टर' बम भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यहां न केवल मिसाइलें जमा की जाती हैं, बल्कि उन्हें सीधे यहीं से बनाने और लॉन्च करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। 2000 किमी तक मार करने की क्षमता: ईरान के पास मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों का सबसे बड़ा भंडार है। इसकी शक्ति को दो भागों में बांटा जा सकता है:

कम दूरी (150-800 किमी) : ईरान फतेह-110 और शाहब-1 जैसी मिसाइलों के माध्यम से कतर, बहरीन, सऊदी अरब और इराक जैसे पड़ोसी देशों तक सीधी पहुंच रखता है।

मध्यम दूरी (2000 किमी तक): शाहब-3 और सेज्जिल जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें 2000 किमी तक मार कर सकती हैं। यह मारक क्षमता पूरे इज़राइल और मध्य पूर्व में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को कवर करती है। रडार को चकमा देने वाले 'आत्मघाती ड्रोन': न केवल मिसाइलें, बल्कि ईरान की रणनीति में शाहेद-136 जैसे 'आत्मघाती ड्रोन' भी महत्वपूर्ण हैं। इस ड्रोन की मारक क्षमता 2500 किमी है। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत धीमी गति से और कम ऊंचाई पर उड़ता है, जिसके कारण अत्याधुनिक रडार प्रणाली भी इसे पकड़ नहीं पाती।

होर्मुज जलडमरूमध्य: विश्व के लिए एक आर्थिक खतरा। युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़ा जाता, बल्कि अर्थव्यवस्था से भी लड़ा जाता है। ईरान के पास 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को नियंत्रित करने की क्षमता है। गौरतलब है कि विश्व के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को बंद करने की अपनी धमकी को अंजाम देता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि हमारे आधे तेल आयात इसी मार्ग पर निर्भर हैं। क्या गुप्त सुरंगों का यह साम्राज्य ईरान को बचा पाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान कई दिनों तक अपने आक्रमण जारी रखने में सक्षम है। हालांकि, प्रौद्योगिकी और उपग्रह निगरानी के इस युग में, क्या ये गुप्त सुरंगें ईरान को पूर्ण सुरक्षा प्रदान कर पाएंगी? यह तो समय ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, ईरान की यह 'गुप्त सुरंग' पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है।

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