कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सुपरकंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के बीच, पृथ्वी डेटा केंद्रों के लिए भूमि, बिजली और पानी की गंभीर कमी का सामना कर रही है। इस वैश्विक समस्या के स्थायी समाधान के रूप में, तकनीकी उद्यमी एलोन मस्क अब डेटा केंद्रों को पृथ्वी की सतह से हटाकर सीधे अंतरिक्ष में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। स्पेसएक्स के 'स्टारशिप' रॉकेट और मस्क की एआई कंपनी 'एक्सएआई' के संयुक्त दृष्टिकोण के तहत भविष्य के विशाल डेटा केंद्रों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना पर विचार किया जा रहा है।

वर्तमान में, हजारों उच्च-स्तरीय जीपीयू प्रोसेसर अत्याधुनिक एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और भारी मात्रा में डेटा संसाधित करने के लिए दिन-रात चल रहे हैं, जिससे वैश्विक विद्युत ग्रिड पर भारी दबाव पड़ रहा है। एक बड़ा पारंपरिक डेटा सेंटर एक छोटे शहर के बराबर बिजली की खपत करता है, यही कारण है कि वैश्विक डेटा सेंटर दुनिया की कुल ऊर्जा का लगभग 3% से 4% उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, सुपरकंप्यूटरों को अधिक गर्म होने से बचाने के लिए शीतलन प्रणालियों में प्रतिदिन लाखों लीटर शुद्ध जल का उपयोग किया जाता है। भूमि की बढ़ती कीमतें, पर्यावरणीय प्रतिबंध और पृथ्वी पर ग्रिड कनेक्शन प्राप्त करने में देरी ने एआई अवसंरचना के विस्तार में गंभीर बाधाएँ उत्पन्न की हैं।

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने के कई प्राकृतिक लाभ हैं, जो इस खतरे को कम करते हैं। पृथ्वी की निचली कक्षा में, पृथ्वी के वायुमंडल और बादलों से बाहर, चौबीसों घंटे सूर्य का प्रकाश उपलब्ध रहता है, जहाँ कभी रात नहीं होती। इस अक्षय और स्वच्छ सौर ऊर्जा की सहायता से, सर्वर बिना किसी बिजली ग्रिड के निरंतर बिजली प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, अंतरिक्ष का निर्वात अत्यंत ठंडा होता है, इसलिए सर्वरों को ठंडा रखने के लिए महंगे एयर कंडीशनर या पानी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि विशेष रेडिएटरों के माध्यम से गर्मी प्राकृतिक रूप से बाहर निकल जाती है।

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स्पेसएक्स का स्टारशिप रॉकेट इस परियोजना को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाएगा। स्टारशिप एक ही उड़ान में 100 से 150 टन भार को बहुत कम लागत पर कक्षा में ले जाने में सक्षम है, जिससे मॉड्यूलर सर्वर रैक को अंतरिक्ष में पहुंचाना आर्थिक रूप से संभव हो जाता है। इसके साथ ही, स्टारलिंक के ऑप्टिकल स्पेस-लेजर नेटवर्क की मदद से अंतरिक्ष से पृथ्वी तक अत्यंत तीव्र डेटा संचरण भी संभव हो सकेगा।

हालांकि, इस योजना के सामने तकनीकी चुनौतियां भी उतनी ही गंभीर हैं। सौर ज्वालाएं और अंतरिक्ष में ब्रह्मांडीय विकिरण सामान्य माइक्रोचिप्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए विशेष विकिरण-रोधी सिलिकॉन चार्ज विकसित करना आवश्यक हो जाता है। इसके अलावा, कक्षा में मानव तकनीशियनों की अनुपस्थिति में, सर्वरों की मरम्मत और रखरखाव पूरी तरह से स्वायत्त रोबोटिक प्रणालियों पर निर्भर होगा। हालांकि, पृथ्वी पर ऊर्जा की कमी को देखते हुए, अंतरिक्ष-आधारित क्लाउड कंप्यूटिंग आने वाले वर्षों में वैश्विक प्रौद्योगिकी को एक नई दिशा प्रदान करेगी।