आज के डिजिटल युग में, जहां साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने त्वरित और सराहनीय कार्रवाई करके एक बड़ी सफलता हासिल की है। चांगोदर क्षेत्र में चर्चित 'बॉस स्कैम' का शिकार हुई एक दवा कंपनी को हुए 3 करोड़ रुपये में से 2.88 करोड़ रुपये मूल मालिक को सफलतापूर्वक लौटा दिए गए हैं।

पूरी घटना क्या थी?

चांगोदर स्थित 'प्योर एंड क्योर फार्मा' कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत हार्दिक पटेल के साथ यह साइबर धोखाधड़ी की गई। पहचान की चोरी और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हुए, जालसाज ने कंपनी के निदेशक की तस्वीर को अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल पिक्चर (डीपी) के रूप में लगा रखा था। इसके बाद, हार्दिक पटेल को मैसेज के जरिए एक विशिष्ट बैंक खाते में तुरंत 3 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया। निदेशक के आदेश को समझते हुए, अकाउंटेंट ने कई लेनदेन के माध्यम से राशि ट्रांसफर कर दी।

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लेन-देन पूरा होने के बाद जब लेखाकार ने कंपनी के निदेशक से फोन पर बात की, तो पता चला कि निदेशक ने ऐसा कोई संदेश या आदेश नहीं दिया था। लेखाकार को जैसे ही पता चला कि वह साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गया है, उसने तुरंत साइबर हेल्पलाइन, चांगोदर पुलिस स्टेशन और एलसीबी से संपर्क किया।

त्वरित पुलिस कार्रवाई और धन के स्रोत का पता लगाना

घटना की गंभीरता को देखते हुए, अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस टीम ने साइबर सेल की मदद से तुरंत कार्रवाई शुरू की। घटना के 4 से 5 घंटे के भीतर ही पुलिस ने उन बैंक खातों का पता लगा लिया जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया था। बैंकों से संपर्क करने के बाद, 3 करोड़ रुपये में से 2.94 करोड़ रुपये तुरंत फ्रीज कर दिए गए। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 2.88 करोड़ रुपये की एक बड़ी राशि मूल मालिक को सफलतापूर्वक लौटा दी गई है।

पुलिस की जांच में पता चला है कि इस साइबर गिरोह ने पैसों को छिपाने के लिए अंतरराज्यीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया। धोखाधड़ी की रकम सबसे पहले आंध्र प्रदेश के गोकुल गुरुवर्धन के खाते में गई, वहां से 6 लाख रुपये मध्य प्रदेश के उपदेश यादव के खाते में भेजे गए और अंत में शेष राशि जम्मू-कश्मीर स्थित एक बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी गई।

अंतरराज्यीय गिरोह को पकड़ने के लिए जांच तेज कर दी गई है।

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के सरगनाओं और अन्य सहयोगियों को पकड़ने के लिए आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग टीमें बनाकर व्यापक जांच शुरू कर दी है। साइबर अपराध के मामले में 'गोल्डन आवर' में मिली सूचना के कारण इतनी बड़ी रकम बरामद होना पुलिस की सतर्कता और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।