अमेरिका को 3 अप्रैल तक रूस से सस्ता तेल खरीदने की अनुमति दी गई है।

  • रूस से कच्चे तेल के आयात के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का संकट फिलहाल टल गया है।

    ADVERTISEMENT
  • समुद्र में इंतजार कर रहे 95 लाख बैरल तेल के टैंकर अब भारत आएंगे।

  • मध्य पूर्व युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत 83 डॉलर के पार पहुंची, भारत को रियायती तेल से बड़ा समर्थन मिलेगा।

  • ईरान के दबाव को कम करने के लिए 'विशेष लाइसेंस' देकर भारत की मदद की।

  • भारत में केवल 5 मार्च तक लोड किए गए रूसी तेल कार्गो को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

    ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, भारत के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की आशंकाओं के बीच, अमेरिका ने भारत को 3 अप्रैल, 2026 तक रूस से सस्ते कच्चे तेल खरीदने का विशेष लाइसेंस प्रदान किया है। इस निर्णय से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।

    भारत के प्रति ट्रंप प्रशासन का नरम रुख

    अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर घोषणा की कि राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के तहत भारत को 30 दिनों की विशेष छूट दी गई है। भारत को अमेरिका का 'अत्यावश्यक साझेदार' बताते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे ईरान के दबाव को कम करने के लिए यह 'अस्थायी' व्यवस्था की गई है। अमेरिका को उम्मीद है कि इस छूट के बाद भारत आने वाले समय में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।

    समुद्र में फंसा हुआ 95 लाख बैरल तेल साफ कर दिया गया है।

    अमेरिकी वित्त विभाग की 'ओएफएसी' द्वारा जारी इस लाइसेंस का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि प्रतिबंधों के कारण एशियाई जलक्षेत्र में अटके रूसी तेल जहाज अब भारत पहुंच सकेंगे। लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल फिलहाल समुद्र में फंसा हुआ है। 5 मार्च तक लोड किए गए जहाज अब 3 अप्रैल तक भारतीय बंदरगाहों पर तेल पहुंचा सकेंगे। इससे रूस को कोई नया आर्थिक लाभ नहीं होगा, लेकिन भारत को समय पर सस्ता तेल मिल जाएगा।

    वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल

    मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और सऊदी अरामको जैसी प्रमुख रिफाइनरियों पर हमलों ने वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों को 83.07 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है। ऐसे में अगर भारत को रूस से रियायती दर पर तेल नहीं मिलता है, तो देश में महंगाई दर आसमान छू सकती है।

    भारत के लिए रूसी तेल इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

    भारत अपनी कच्चे तेल की 88% आवश्यकताओं का आयात करता है। रूस भारत को मानक कीमतों से कम दामों पर तेल उपलब्ध कराता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है। जनवरी में रूस का आयात घटकर 1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जो फरवरी में फिर से बढ़कर 30% हो गया। सस्ते तेल की उपलब्धता के कारण रिफाइनरियों की लागत कम हो जाती है और देश में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहती हैं।

    संक्षेप में, अमेरिका के इस राजनयिक निर्णय ने भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले बोझ को अस्थायी रूप से टाल दिया है और सरकार को आपूर्ति श्रृंखला को प्रबंधित करने के लिए एक अतिरिक्त महीने का समय दिया है।