शहर की जीवनरेखा साबरमती नदी के किनारे बसे नागरिकों और इससे होकर गुजरने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। वासना बैराज के फाटकों की मरम्मत और सुभाष पुल के ऊपरी ढांचे को गिराने के बाद, साबरमती नदी को खाली करने की प्रक्रिया आज यानी 15 अप्रैल से शुरू हो गई है। नदी में जलस्तर कम करके इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अगले तीन महीनों में पूरा किया जाएगा।
वासना बैराज: 30 में से 18 गेट बदले जाएंगे
राज्य सरकार के सिंचाई विभाग द्वारा 'बांध सुरक्षा' के तहत किए गए निरीक्षण में पाया गया कि बांध को मजबूत करने के लिए तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।
अवधि: 15 अप्रैल से 15 जून तक (लगभग 3 महीने)।
संचालन: कुल 30 फाटकों में से 18 फाटक बिल्कुल नए होंगे, जबकि शेष फाटकों की आवश्यक मरम्मत की जाएगी।
उद्देश्य: मानसून से पहले बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जल भंडारण क्षमता बढ़ाना।
सुभाष ब्रिज के 6 ढांचे ध्वस्त किए जाएंगे
नदी के खाली होने से अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) को सबसे अधिक लाभ होगा। इस दौरान सुभाष पुल के पुनर्निर्माण परियोजना के अंतर्गत पुराने पुल के ढांचे को ध्वस्त करने का कार्य पूरी गति से चलेगा।
अब क्यों? क्योंकि पुल का मलबा नदी में गिरता है, और अगर नदी में पानी हो तो इससे परिचालन में बाधा आती है।
योजना: विध्वंस प्रक्रिया अगले ढाई से तीन महीनों में पूरी हो जाएगी। नदी में पानी भर जाने के बाद, नए पुल के ढांचे पर काम जारी रह सकता है।
नागरिकों पर प्रभाव
साबरमती नदी को खाली करने से नदी तट का स्वरूप बदल जाएगा और नौका विहार जैसी गतिविधियाँ कुछ समय के लिए बंद रह सकती हैं। हालांकि, यह कार्य शहर की दीर्घकालिक सुरक्षा और यातायात प्रबंधन (पुलों) के लिए आवश्यक है।





